भारत देश और भारतीय संस्कृति

भारतीय संस्कृति को किसी भी प्रकार से केवल शब्दों के माध्यम से व्यक्त नहीं किया जा सकता है। संस्कृति जिसे अंग्रेजी में कल्चर भी कहते हैं, यह दोनों सुनने में सामान लगते हैं परंतु इन दोनों का तुलनात्मक अर्थ बहुत ही विपरीत है। जहाँ किसी भी देश की सभ्यता उस देश में रहन-सहन की व्यवस्था को दर्शाता है, वही आर्यावर्त की संस्कृति को केवल मात्र शब्दों में व्यक्त कर पाना संभव नहीं है। क्योंकि आर्यावर्त (वर्तमान में भारतवर्ष) की संस्कृति बहुत ही पुरातन है। जब अन्य सभ्यताएं गुफाओं में निवास करती थी, आदिमानव का जीवन व्यतीत करती थी, उस समय हमारे देश हमारे जंबूद्वीप कि संस्कृति और इसकी तकनीक इतनी अधिक अत्याधुनिक थी जिसका अनुमान आप उस समय के पत्थरों से बने धरोहरों के माध्यम से ही लगा सकते हैं। चाहे आप बात कर ले मोहनजोदड़ो हड़प्पा की या फिर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आपको हमारी अत्याधुनिक संस्कृति के हजारों उदाहरण मिल जाएंगे।

संस्कृति का अर्थ है – स्थिति में निरंतर उन्नति होना। प्राचीन काल से ही मनुष्य का यह स्वभाव रहा है की वह लगातार अपने बुद्धि के प्रयोग से अपने रहन-सहन की स्थिति में सुधार व उन्नति करता आया है। परंतु भारतीय (आर्यवर्ती) संस्कृति न केवल अपने बुद्धि के प्रयोग से स्वयं को अपितु अपने साथ साथ प्रकृति के उन्नति का भी साथ दिया है।

जहां सभ्यता (Civilization) से हमें हमारे आसपास की भौतिक प्रगति की जानकारी प्राप्त होती है, वही संस्कृति (Culture) के माध्यम से हमें हमारे मानसिक व बौधिक क्षेत्र की प्रगति की जानकारी प्राप्त होती है। जिस समय संपूर्ण विश्व केवल भोजन के लिए जीता था, उस समय हमारे देश की उन्नत संस्कृति अपने चरम पर थी। जिसका सटीक उदाहरण आप आज के संगीत, साहित्य, मूर्तिकला, चित्र व वास्तुकला के माध्यम से देख सुन व समझ सकते हैं।

हमारी संस्कृति में ज्ञान का भंडार था। हमारे संपूर्ण देश में आज भी इतनी सारी विविधताए हैं जिनको यहां शब्दों के माध्यम से व्यक्त करना संभव नहीं है। ‘हमारी संस्कृति में ज्ञान का भंडार था’ इसे हम एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं।

Sanskriti
नृत्य मुद्रा में एक महिला

जहां संपूर्ण विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में चाइनीस, अंग्रेजी, स्पेनिश इत्यादि भाषाएं बोली व लिखी जाती हैं, परंतु इनमें स्पष्टता वह सटीकता नहीं है। इनमें से कोई भी भाषा व्यग्निक नहीं है। यहाँ यदि हम बात करें अंग्रेजी की तो अंग्रेजी के कई शब्द संस्कृत शब्दों से लिए गए हैं। यदि हम बात करें भारतवर्ष की तो यहां हर राज्य का अपना खुद का एक भाषा है। वह भी हर प्रकार से सटीक व स्पष्ट है। यहां के सभी भाषाओं में वैज्ञानिकता का आधार है। इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि हमारी संस्कृति में ज्ञान का भंडार था।

भारत की संस्कृति

अब मुख्यतः बात करें भारत की संस्कृति के बारे में तो भारतवर्ष की संस्कृति बहुआयामी है। यहाँ भारत के महान इतिहास की शुरुआत अति प्राचीन है, परंतु सिंधु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई, हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध धर्म के साथ-साथ कई अन्य धर्म एवं पंथ की विरासत इसमें शामिल हैं।

भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करती एक तस्वीर
भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करती एक तस्वीर

आदि काल में हमारी भारतीय साहित्य की शुरुआत मौखिक रूप से प्रेषित थी। क्योंकि उस समय हमारी संस्कृति में संगीत की परंपरा बेहद समृद्ध थी और उस समय कुशल संगीतकार व कवि हुआ करते थे। इसी कारण उस समय वेदों को श्लोकों के माध्यम से स्मरण किया जाता था, और यहीं से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इस ज्ञान को प्रेषित किया जाता था, ताकि इस अत्याधुनिक ज्ञान का कोई दुष्ट व्यक्ति दुरुपयोग ना कर पाए। वेदों के बाद रामायण व महाभारत के महाकाव्यों की रचना हुई। रामायण और महाभारत प्राचीनतम संरक्षित महाकाव्य में से एक हैं। यह केवल भारत ही नहीं अपितु कुछ दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों जैसे थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में अपनाए गए हैं।

भारतीय संस्कृति की विशेषता

  • भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व में प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। हमारी संस्कृति एक कर्म प्रधान संस्कृति मानी गई है। मोहनजोदड़ो की खुदाई के बाद से संपूर्ण विश्व ने यह माना है कि भारतीय संस्कृति सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है।
  • प्राचीनता के साथ-साथ हमारी संस्कृति आज भी जीवित है। यह एक अमर संस्कृति है। चीनी संस्कृति के अतिरिक्त (जो भारतीय संस्कृति की ही एक शाखा है) के अलावा दुनिया की अन्य सभी संस्कृतियां समाप्त हो चुकी है,आज उनके कुछ अवशेष ही उनकी गौरव गाथा गाने के लिए बचे हैं। परंतु भारतीय संस्कृति कई हजार वर्षों तक काल के सभी दुखों और कष्टों को रहते हुए भी आज तक जीवित है।
  • भारतीय संस्कृति की विशेषता उसका जगतगुरु होना है। क्योंकि भारत में ही संपूर्ण विश्व को सभ्यता का पाठ पढ़ाया, अपितु भारत के बाहर भी कई आदिमानव जातियों को सभ्य बनाया और इन सब का उदाहरण आप को संपूर्ण विश्व में फैले भारतीय मंदिरों वास्तुकला इत्यादि के माध्यम से मिल जाएगा।
  • सबसे अंतिम बात जो हमारी संस्कृति की विशेषता को दर्शाता है वह है इसकी उदारता, प्रेम, सहिष्णुता, सर्वांगीणता और इसकी विशाल हृदयता। भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जो सभी संस्कृतियों का आदर करते हुए अपनी संस्कृति का ज्ञान व तकनीक कि शिक्षा बिना किसी भेदभाव व लोभ के सभी जनों तक पहुंचाया।

इति, नमो नमः

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